31 अगस्त 2016 - 13:44
यमन, सऊदी अरब ने जानबूझ कर बच्चों को बनाया है निशाना।

यमन में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मामलों के समन्वयक जिमी मिक गोल्डरिक ने पुष्टि की है कि यमन में अट्ठारह महीने से जारी लड़ाई में दस हजार लोग मारे गए हैं।

अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी अबना: यमन में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मामलों के समन्वयक जिमी मिक गोल्डरिक ने पुष्टि की है कि यमन में अट्ठारह महीने से जारी लड़ाई में दस हजार लोग मारे गए हैं।
इससे पहले यमन के स्थानीय सूत्रों का कहना था कि सऊदी अरब और उसके सहयोगी दलों के हमलों में दस हजार लोग मारे गए हैं लेकिन संयुक्त राष्ट्र की ओर से मरने वालों की संख्या छः हजार बताई जा रही थी। लेकिन अब यमन में संयुक्त राष्ट्र मामलों के समन्वयक जिमी मिक गोल्डरिक ने मंगलवार को सनआ में एक संवाददाता सम्मेलन में इस बात की पुष्टि कर दी है कि यमन में अस्पताल के सूत्रों ने जो आंकड़े पेश किए हैं उनके अनुसार यमन की लड़ाई में अब तक दस हजार लोग मारे जा चुके हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यमन लड़ाई में मारे जाने वालों की संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र के उक्त अधिकारी का कहना है कि चूंकि यमन के कुछ क्षेत्रों में चिकित्सालय नहीं हैं इसलिए इन क्षेत्रों में मरने वालों का पंजीकरण नहीं हो सकता है। उनका कहना था कि कुछ क्षेत्रों में मरने वालों के परिजन अपने रिश्तेदारों के जनाज़े संबंधित सरकारी एजेंसियों को सूचना दिए बिना ही दफ़ना देते हैं।
इस बीच पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने घोषणा की थी कि सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के हमलों में लगभग चार हजार यमनी बच्चे मारे गए हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने अपने बयान में कहा था कि जिन क्षेत्रों में सऊदी हमलों में यमनी बच्चे मारे गए हैं वहां समीक्षा से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि सऊदी विमानों ने जानबूझकर बच्चों और आवासीय क्षेत्रों को निशाना बनाया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने यमन के आवासीय क्षेत्रों, बाजारों, अस्पतालों और स्कूलों में सऊदी अरब के हमलों की ओर इशारा करते हुए कैलसटर बमों और अन्य अवैध हथियारों के उपयोग पर सऊदी अरब की निंदा की थी।
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने जून के शुरू में भी अपनी एक रिपोर्ट में सऊदी अरब और उसके सहयोगियों का नाम बच्चों के अधिकार हनन करने वाले और बच्चों के हत्यारे देशों की सूची में शामिल किया था लेकिन संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने छः जून को सऊदी अरब और उसके सहयोगियों का नाम ब्लैक लिस्ट से निकाल दिया था और कुछ दिनों के बाद स्वीकार किया था कि उन पर सऊदी अरब का दबाव था और सऊदी सरकार ने धमकी दी थी कि अगर उसका नाम ब्लैक लिस्ट से न निकाला गया तो वह संयुक्त राष्ट्र के लिए अपनी वित्तीय सहायता बंद कर देगा।